Wednesday, December 31, 2025
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#directsellingsahihai – नौकरी नहीं, उद्यमिता की ज़रूरत: भारत में डायरेक्ट सेलिंग का बढ़ता महत्व !

By: Pushkar Mishra- भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे देश में है, जो ऊर्जा, सपनों और संभावनाओं से भरी हुई है। लेकिन इसके साथ-साथ दो बड़ी चुनौतियाँ भी हमारे सामने हैं, जो व्यक्ति और देश दोनों की प्रगति को प्रभावित कर रही हैं।

  1. स्वास्थ्य संकट: बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ

भारत आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती का सामना कर रहा है। आँकड़े बताते हैं कि:

  • भारत में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 63–65% मौतें नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़ (NCDs) के कारण होती हैं, जैसे हृदय रोग, डायबिटीज़, कैंसर और सांस संबंधी बीमारियाँ।
  • 56% से अधिक रोगों का बोझ अस्वस्थ खान-पान और जीवनशैली से जुड़ा हुआ है।
  • भारत आज दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्या सबसे अधिक है, अनुमानतः 20 करोड़ से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं।

ये बीमारियाँ केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसकी कार्य क्षमता, आर्थिक स्थिति और परिवार की स्थिरता को भी प्रभावित करती हैं। एक अस्वस्थ समाज कभी भी तेज़ी से आगे नहीं बढ़ सकता।

  1. बेरोज़गारी और बदलता जॉब मार्केट :

जहाँ एक ओर तकनीक और AI तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रोज़गार के पारंपरिक अवसर कम होते जा रहे हैं:

  • भारत में औसत बेरोज़गारी दर लगभग 5% के आसपास है, लेकिन युवाओं में यह दर कहीं अधिक है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में।
  • AI, ऑटोमेशन और नई तकनीकों के कारण कई नौकरियाँ समाप्त हो रही हैं, और नई नौकरियों के लिए नए कौशल आवश्यक हो गए हैं।
  • डिग्री होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में युवा रोज़गार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

यह स्थिति बताती है कि अब केवल नौकरी की तलाश पर्याप्त नहीं है—हमें स्वरोज़गार और उद्यमिता की ओर बढ़ना होगा।

डायरेक्ट सेलिंग: स्वास्थ्य, शिक्षा और संपन्नता का समाधान

डायरेक्ट सेलिंग केवल एक बिज़नेस मॉडल नहीं, बल्कि समग्र सशक्तिकरण का माध्यम है।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता : डायरेक्ट सेलिंग के माध्यम से हेल्थ और वेलनेस से जुड़े उत्पाद केवल बेचे नहीं जाते, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित किया जाता है।

शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट : डायरेक्ट सेलिंग व्यक्ति को व्यावहारिक रूप से सिखाती है –

  • Communication Skill
  • Leadership 
  • Financially Literacy  
  • Digital Marketing 
  • Self Growth

 सम्मानजनक आय और संपत्ति निर्माण डायरेक्ट सेलिंग:

  • कम निवेश में शुरुआत
  • मेहनत के आधार पर कमाई
  • Residual Income
  • लचीलापन और स्वतंत्रता
  • टीम और सिस्टम के ज़रिए दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण

यह मॉडल उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिनकी नौकरियाँ तकनीक के कारण प्रभावित हो रही हैं।

डायरेक्ट सेलिंग सिर्फ़ कमाई नहीं, बल्कि व्यक्ति, परिवार और समाज के सम्पूर्ण विकास की यात्रा है। भारत को केवल नौकरियों की नहीं, बल्कि जागरूक और सक्षम उद्यमियों की आवश्यकता है। डायरेक्ट सेलिंग इस परिवर्तन की एक सशक्त राह है।

By: Pushkar Mishra (Aplomb Health Care Ltd)

 

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